छात्र अब नहीं होंगे फेल, सरकार लाई नया फॉर्मूला

सरकारी और निजी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में इंजीनियरिंग डिप्लोमा (Diploma of Engineering in Government and Private Polytechnic Colleges) में अटके 50 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को परीक्षा 'पास कराने' के लिए प्राविधिक शिक्षा मण्डल, जोधपुर (Technical Education Board, Jodhpur) द्वारा फिर नया फॉर्मूला लाया गया है। मण्डल की ओर से डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की वार्षिक परीक्षा के पैटर्न में 30 नंबर के वस्तुनिष्ठ-प्रश्न शामिल किए गए हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक ने राज्य के सभी पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजा है। इसके मुताबिक सत्र 2019-20 की वार्षिक परीक्षा से नया पैटर्न लागू होगा। इधर, तकनीकी शिक्षा के जानकारों का कहना है कि नया प्रारूप लागू होने से परीक्षा में पास होना आसान हो जाएगा। पूरे पेपर में 42.85 फीसदी से ज्यादा अंकों के सवालों को 'एक इशारे में' हल करने की सहूलियत मिल जाएगी। पास होने के लिए 70 में से 23 नंबर चाहिए। पहले भाग में 30 में से 15 अंक भी आएं, तो बाकी के 40 में से सिर्फ आठ अंक पास होने के लिए चाहिए। दरअसल, अब तक पूरे 70 अंक का पेपर सब्जेक्टिव ही होता था, जिसमें सवालों का जवाब विस्तार से देना होता था।

काबिल बनाना जरूरी
परीक्षा पैटर्न को अपग्रेड किया जाना जरूरी था। राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी शिक्षा नीतियों को लागू कर हमारे संस्थानों को बराबरी पर लाना चाहते हैं। सेमेस्टर सिस्टम सब जगह है। किसी भी सिस्टम का मकसद बच्चों को फेल करना नहीं होता। उन्हें फेल करने की बजाय काबिल करना जरूरी है।
शुचि शर्मा, सचिव,

ऐसा होगा नया प्रारूप
अधिकतम 70 अंकों के प्रश्न-पत्र में दो भाग होंगे। पहला भाग 30 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का होगा, जिसमें 30 प्रश्न होंगे। 40 अंकों वाले द्वितीय भाग में वर्णनात्मक प्रश्न शामिल होंगे। इनमें पूर्व की भांति आठ प्रश्न होंगे, जिनमें से कोई चार ही हल करने होंगे। प्रत्येक प्रश्न 10 अंकों का होगा।
राज्यभर के आंकड़े
4500 सीटें हैं सरकारी कॉलेजों में
(प्रदेशभर में )
7 गुना ज्यादा सीटें निजी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में
(सरकारी कॉलेजों के सापेक्ष)



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